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खगड़िया में पारिवारिक मंच पर दिखी सियासी दूरी पाटने की झलक, चिराग पासवान ने चाचा पशुपति पारस से लिया आशीर्वाद

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खगड़िया: बिहार की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने न सिर्फ राजनीतिक हलकों बल्कि आम लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस भावुक क्षण ने वर्षों से चली आ रही सियासी दूरियों के बीच रिश्तों की गर्माहट को उजागर कर दिया।
यह मौका खगड़िया जिले के शहरबन्नी स्थित पैतृक आवास पर आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा का था। इस कार्यक्रम का आयोजन दिवंगत परिजन की स्मृति में किया गया था, जहां परिवार के कई सदस्य और समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद थे। इस दौरान चिराग पासवान विशेष रूप से अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। चिराग पासवान ने पुष्पांजलि देकर अपने दिवंगत परिजन को याद किया और परिवार के साथ कुछ समय बिताया। इसी बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे माहौल को भावुक बना दिया।
चिराग पासवान सीधे अपने चाचा पशुपति पारस के पास पहुंचे और पारंपरिक भारतीय संस्कृति का पालन करते हुए उनके चरण स्पर्श किए। इस पर पशुपति पारस ने भी उन्हें स्नेहपूर्वक गले लगाया और आशीर्वाद दिया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए एक खास पल बन गया, जिसे सभी ने ध्यान से देखा और सराहा।
इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच सहज बातचीत भी देखने को मिली। लंबे समय से राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस तरह का व्यवहार रिश्तों में बनी आत्मीयता को दर्शाता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच बातचीत सामान्य और सौहार्दपूर्ण रही, जिससे माहौल में सकारात्मकता झलकती रही।
इस अवसर पर चिराग पासवान अपने चचेरे भाई प्रिंस राज से भी गले मिलते नजर आए। यह दृश्य परिवार के भीतर एकजुटता और आपसी रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बन गया।
ज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्षों में लोक जनशक्ति पार्टी के भीतर हुए विभाजन के बाद परिवार में राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए थे। पार्टी के दो गुटों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला, जिससे चिराग पासवान और पशुपति पारस के संबंधों में दूरी बढ़ गई थी। यह खटास बिहार की राजनीति में भी साफ दिखाई देती रही।
हालांकि, इस पारिवारिक कार्यक्रम में जिस तरह से दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया, उससे यह संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत रिश्तों की डोर अभी भी मजबूत है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद पारिवारिक संबंधों को महत्व दिया जाना इस मुलाकात की सबसे बड़ी विशेषता रही।
कार्यक्रम के दौरान समर्थकों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। “रामविलास पासवान अमर रहें” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। यह नारे दिवंगत नेता रामविलास पासवान के प्रति लोगों के सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा सकते हैं। भले ही यह एक पारिवारिक आयोजन था, लेकिन जिस तरह से दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाया, वह भविष्य में संबंधों के सामान्य होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की राजनीति में पासवान परिवार की एक अहम भूमिका रही है। ऐसे में परिवार के भीतर किसी भी तरह की नजदीकी या दूरी का असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ता है। इस घटना ने यह संदेश दिया है कि राजनीति से ऊपर परिवार और रिश्तों का महत्व कायम रहता है।
यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस तरह के और मौके देखने को मिल सकते हैं, जहां दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना बने। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि इस मुलाकात का सीधा असर राजनीतिक गठजोड़ या समीकरणों पर पड़ेगा, लेकिन सकारात्मक संकेत जरूर सामने आए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि राजनीतिक मतभेद चाहे जितने भी गहरे क्यों न हों, पारिवारिक रिश्तों की अपनी अलग अहमियत होती है। खगड़िया में हुआ यह भावुक मिलन इसी बात का उदाहरण बनकर उभरा है।
फिलहाल, इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पारिवारिक नजदीकी राजनीतिक रिश्तों में भी किसी बदलाव का संकेत देती है या नहीं।

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